बुधवार 8 अप्रैल 2026 - 12:18
अहंकारी तंत्र के मुक़ाबले के लिए मीडिया और क़ानूनी मोर्चे को मज़बूत बनाना अपरिहार्य है: हुज्जतुल-इस्लाम हुसैनी कोहसारी

 हौज़ा इल्मिया ईरान के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के प्रमुख हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन सैयद मुफ़ीद हुसैनी कोहसारी ने कहा है कि अहंकारी तंत्र के मुकाबिल मे इंकिलाब-ए-इस्लामी के बुनियादी, विचारधारात्मक और सांस्कृतिक-सभ्यता स्तंभों में शामिल है, और आलमी इस्तिकबारी निज़ाम के ख़िलाफ़ जद्दोजहद महज़ सियासी प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक सर्वांगीण सैद्धांतिक व व्यावहारिक रणनीति है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम-ए-मुक़द्दसा में मजमा-ए-जहानी-ए-अहले बैत (अलैहिमुस्सलाम) के तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस "शहीद रहबर-ए-इंकिलाब की फिक्र में इस्तिकबार की मुख़ालिफ़त" से ख़िताब करते हुए उन्होंने कहा कि हालिया क्षेत्रीय व आलमी हालात इस बात का संकेत करते हैं कि इस्लामी जम्हूरिया ईरान ने निज़ाम-ए-इस्तिकबार के मुक़ाबले में अहम कामयाबियाँ हासिल की हैं, और अब जद्दोजहद का अगला मरहला इन कामयाबियों के मजबूती और भविष्य के ख़तरात से सुरक्षा के लिए है।

उन्होंने कहा कि इस्तिकबारी निज़ाम की मुख़ालिफ़त इस्लामी संस्कृति का हिस्सा है, जिसमें एक तरफ़ ज़ुल्म, प्रभुत्व और उपनिवेशवादी ढाँचों की अस्वीकार की जाती है, जबकि दूसरी तरफ़ तौहीद, इलाही प्रभुसत्ता, नैतिकता और आध्यात्मिकता पर आधारित निज़ाम का गठन को लक्ष्य बनाया जाता है।

सैयद मुफ़ीद हुसैनी कोहसारी ने स्पष्ट किया कि आलमी इस्तिकबारी निज़ाम के ख़िलाफ़ प्रभावी मुक़ाबला सिर्फ सैन्य मैदान तक सीमित नहीं, बल्कि यह मीडिया, संस्कृति, प्रवचन और विचारधारात्मक मोर्चे पर भी यकसाँ ध्यान की माँग करने वाला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में मीडिया वार और क़ानूनी मोर्चा ग़ैर-मामूली अहमियत इख़्तियार कर चुके हैं, क्योंकि इस्तिकबारी ताक़तें इन्हीं साधनों से अपनी मर्ज़ी के विचार दुनिया पर थोपना चाहती हैं।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि मिल्लतों के इरादे को मज़बूत बनाना,प्रतिरोधी विचारों का विकास देना, उपनिवेशवाद के इतिहास से आगाही पैदा करना, इस्लामी मुल्कों के बीच सहयोग बढ़ाना और आलमी स्तर पर इंसानी व इस्लामी जागरूकता को मजबूती देना, इस जद्दोजहद के अहम आवश्यकताएँ हैं।

आख़िर में उन्होंने कहा कि अगरचे इस मुकाबले की कुछ कीमत अदा करनी पड़ी है, लेकिन इस्लामी जम्हूरिया ईरान आज एक प्रभावशाली इलाक़ाई और बाज़ मैदानों में आलमी ताक़त के तौर पर उभर चुका है, और यही रास्ता भविष्य की बड़े परिवर्तनों की बुनियाद बन सकता है।

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